ताजमहल नहीं हो सकता ‘भारत की पहचान’

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उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की पुस्तिका में विश्व धरोहर ताजमहल को शामिल ना किये जाने को लेकर हाल में उठे विवाद के बीच भाजपा की राष्ट्रीय अनुशासन समिति के सदस्य सत्यदेव सिंह ने आज कहा कि यह इमारत कभी ‘भारत की पहचान’ नहीं हो सकती।

सिंह ने लाल बहादुर शास्त्री परास्नातक महाविद्यालय के विज्ञान परिसर में स्वच्छता पर आयोजित एक संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि ताजमहल भारत की कोई सांस्कृतिक पहचान नहीं है। उसमें मात्र एक कब्र है, जो देशवासियों को ना तो किसी आदर्श से जोड़ पाती है और ना ही हमें कोई उपलब्धि प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पिछले दिनों जारी पर्यटन मानचित्र वाली पुस्तिका से ताजमहल का नाम हटाए जाने को कुछ राजनीतिक पार्टियां अनावश्यक तूल दे रही हैं। उन्हें समझना चाहिए कि ताजमहल किसी के प्यार की निशानी के सिवाय और कुछ नहीं है।

पूर्व भाजपा सांसद ने कहा कि बाबर, अकबर और हुमायूं भारत के आदर्श कभी नहीं रहे। राम, कृष्ण और महाराणा प्रताप से हमारी पहचान है। वह हमारे आराध्य और आदर्श हैं।

उन्होंने कहा कि भले ही महात्मा गांधी ने स्वच्छता की अलख दक्षिण अफ्रीका से जगाई हो, लेकिन देश के भीतर स्वच्छता का संदेश पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया है।

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